घुश्मेश्वर ज्योतिर्लिंग मंदिर: इतिहास, महत्व और यात्रा मार्गदर्शन | Ghushmeshwar Jyotirlinga Temple

घुश्मेश्वर ज्योतिर्लिंग मंदिर
Photo © Credit: commons.m.wikimedia

Introduction

  • 12 ज्योतिर्लिंग सूचीपत्र: 12 Jyotirlinga Name and state
  • घृष्णेश्वर ज्योतिर्लिंग का इतिहास: Ghushneshwar Jyotirlinga history
  • घृष्णेश्वर मन्दिर का इतिहास: Ghushneshwar Temple history
  • घृष्णेश्वर ज्योतिर्लिंग मंदिर समय: Ghushneshwar Jyotirlinga temple timings
  • घृष्णेश्वर मंदिर के आसपास घूमने के स्थल: Places to visit around Ghushneshwar Jyotirlinga temple

भारतीय पुराणों के अनुसार भगवान शिव ने लोककल्याण एवं प्रकृतिकल्याण हेतु भारत में 12 जगहों पर स्वयंभू प्रकट हुए और लिंग रूप में विराजमान रहे। उन 12 ज्योतिर्लिंगों में से एक घुश्मेश्वर भी है। घुश्मेश्वर ज्योतिर्लिंग को 12 ज्योतिर्लिंगों में से आखरी प्रमुख ज्योतिर्लिंग के रूप में पूजा जाता है।

12 ज्योतिर्लिंग सूचीपत्र | 12 Jyotirlinga List

सोमनाथ ज्योतिर्लिंग मंदिरगुजरात
मल्लिकार्जुन ज्योतिर्लिंग मंदिरआंध्र प्रदेश
महाकालेश्वर ज्योतिर्लिंग मंदिरमध्य प्रदेश
ओम्कारेश्वर ज्योतिर्लिंग मंदिरमध्य प्रदेश
केदारनाथ ज्योतिर्लिंग मंदिरउत्तराखंड
भीमाशंकर ज्योतिर्लिंग मंदिरमहाराष्ट्र
विश्वनाथ ज्योतिर्लिंग मंदिरउत्तर प्रदेश
त्रयम्बकेश्वर ज्योतिर्लिंग मंदिरमहाराष्ट्र
नागेश्वर ज्योतिर्लिंग मंदिरगुजरात
वैद्यनाथ ज्योतिर्लिंग मंदिरझारखंड
रामेश्वर ज्योतिर्लिंग मंदिरतमिलनाडु
घृष्णेश्वर ज्योतिर्लिंग मंदिरमहाराष्ट्र

घुश्मेश्वर ज्योतिर्लिंग मंदिर (Ghushneshwar Jyotirlinga Temple) अजंता एलोरा की गुफाओं के पास देवगिरि के समीप तड़ाग में स्थित है। यह ज्योतिर्लिंग महाराष्ट्र के दौलताबाद से लगभग 18 किलोमीटर दूर बेरूलठ गांव के पास स्थित है। इन्हीं ज्योतिर्लिंगों में द्वादशवें ज्योतिर्लिंग का नाम ‘घुश्मेश्वर’ है। इन्हें ‘घृष्णेश्वर’ और ‘घुसृणेश्वर’ के नाम से भी जाना जाता है।

घुश्मेश्वर ज्योतिर्लिंग
Photo © Credit: Patrika

घुश्मेश्वर ज्योतिर्लिंग के निर्माण का वर्णन हमें शिवमहापुराण के कोटिरुद्रसंहिता में मिलता है। शिवमहापुराण के अनुसार दक्षिण में सुधर्म नामक ब्राह्मण अपनी पत्नी सुदेहा के साथ रहता था। वे दोनों महादेव को अपना आराध्य मानते थे और उनकी प्रतिदिन पूजा करते थे। परंतु, उन्हें संतान सुख नहीं था, जिससे वे परेशान रहते थे।

सुदेहा ने अपने पति सुधर्म को दूसरा विवाह करने का प्रस्ताव रखा। उन्होंने अपनी छोटी बहन घुश्मा से विवाह करने की अनुमति दी। घुश्मा महादेव की परम भक्त थीं। जल्द ही महादेव की कृपा से उन्हें एक पुत्र हुआ, जिसका नाम सुकारव रखा। सुकारव के बड़े होने पर उसका विवाह हो गया, जिससे सुदेहा की ईर्ष्या और बढ़ गई।

एक रात सुदेहा ने सुकारव की हत्या कर दी और उसके पार्थिव देह को तालाब में विसर्जित कर दिया। सुबह होने पर घुश्मा और सुधर्म भगवान शिव की भक्ति में लीन हो गए। पुत्रवधु ने जब पति के बिस्तर पर खून देखा तो जोर-जोर से रोने लगी। सुदेहा ने झूठमूठ का विलाप किया पर घुश्मा भगवान शिव की भक्ति में लीन थीं।

शिवलिंग विसर्जन के दौरान तालाब में सुकारव के जीवित होने का चमत्कार हुआ। भगवान शिव ने प्रकट होकर सुदेहा का अपराध बताया। घुश्मा ने सुदेहा को माफ कर दिया। इस पर भगवान शिव प्रसन्न हुए और वहां सदा के लिए निवास करने का वचन दिया। घुश्मा द्वारा स्थापित शिवलिंग घुश्मेश्वर के नाम से प्रसिद्ध हुआ।

तदोवाच शिवस्तत्र सुप्रसन्नो महेश्वर:। स्थास्येत्र तव नाम्नाहं घुश्मेशाख्य: सुखप्रद:। घुश्मेशाख्यं सुप्रसिद्धं में जायतां शुभ:। इदं सरस्तु लिंगानामालयं जयतां सदा। तस्माच्छिवालयं नाम प्रसिद्धं भुवनत्रये सर्वकामप्रदं हयेत दर्शनात्स्यात्सदासर:।

अर्थात: तब शिव ने प्रसन्न होकर कहा कि घुश्मे, मैं तुम्हारे नाम से घुश्मेश्वर कहलाता हुआ सदा यहां निवास करूंगा और सबके लिये सुखदायक होऊंगा। मेरा शुभ ज्योतिर्लिंग घुश्मेश्वर के नाम से प्रसिद्ध हो। यह सरोवर शिवलिंगों का आलय हो जाये और उसकी तीनों लोकों में शिवालय के नाम से प्रसिद्धि हो। यह सरोवर सदा दर्शन मात्र से ही सभी कामों का फल देने वाला हो।

घुश्मेश्वर मंदिर का इतिहास | Ghusmeshwar temple History

घुश्मेश्वर मंदिर 13वीं और 14वीं शताब्दी में हुए हमलों के कारण क्षतिग्रस्त हुआ। 16वीं शताब्दी में छत्रपति शिवाजी महाराज के दादाजी मालोजीराव भोसले ने इसका पुनः निर्माण किया। एक बार मालोजीराव को सांप के बिल में छुपा खजाना मिला था जिसका उपयोग उन्होंने मंदिर के पुनःनिर्माण में किया था।

18वीं शताब्दी में इंदौर की रानी अहिल्याबाई होलकर ने भी इसका पुनःनिर्माण करवाया। मंदिर की दीवारों पर प्राचीन समय के हिन्दू देवी-देवताओं का चित्रण किया गया है।

घुश्मेश्वर मंदिर में पूजा का समय | Puja Timings at Ghushmeshwar Temple

पूजा गतिविधिसमय
मंदिर खुलने का समय और मंगला आरती4:00 A.M.
दर्शन शुरू5:30 A.M.
जलहरी संघन8:00 A.M.
महा प्रसाद12:00 P.M.
दोपहर की पूजा1:00 P.M. TO 1:30 P.M.
मंदिर बंद होने का समय9:00 P.M.

घुश्मेश्वर मंदिर की यात्रा मार्गदर्शन | Ghushmeshwar Temple Travel Guide

कैसे पहुँचे | How to reach

  1. वायुमार्ग (By Air):
    • औरंगाबाद हवाई अड्डा (Aurangabad Airport) नजदीकी हवाई अड्डा है, जो घृष्णेश्वर ज्योतिर्लिंग से लगभग 35 किमी दूर है।
  2. रेलमार्ग (By Train):
    • औरंगाबाद रेलवे स्टेशन (Aurangabad Railway Station) से टैक्सी या बस के द्वारा मंदिर पहुँचा जा सकता है। यह स्टेशन मंदिर से लगभग 30 किमी की दूरी पर है।
  3. सड़क मार्ग (By Road):
    • औरंगाबाद से टैक्सी या बस द्वारा मंदिर पहुँच सकते हैं। बस सेवाएं राज्य परिवहन और निजी ऑपरेटरों द्वारा उपलब्ध हैं।

घुश्मेश्वर मंदिर के नजदीकी आकर्षण स्थल | Nearest attractions to Ghushmeshwar Temple

  1. एलोरा गुफाएँ (Ellora Caves): विश्व धरोहर स्थल, घृष्णेश्वर मंदिर से मात्र 1 किमी की दूरी पर स्थित हैं।
  2. दौलताबाद किला (Daulatabad Fort): औरंगाबाद से लगभग 15 किमी दूर स्थित ऐतिहासिक किला।
  3. अजंता गुफाएँ (Ajanta Caves): अद्वितीय बौद्ध गुफाएँ, जो कि घृष्णेश्वर मंदिर से लगभग 100 किमी की दूरी पर स्थित हैं।

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