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2026 माघी अमावस्या (मौनी अमावस्या) – धार्मिक महत्व, परंपराएँ और पवित्र स्नान का विशेष दिन

2026 की माघी अमावस्या हिंदू धर्म में अत्यंत पवित्र और विशेष महत्व रखने वाला दिन है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, इस दिन हिंदू धर्म की सबसे पावन और पूजनीय नदी गंगा का जल अमृत में परिवर्तित हो जाता है। इसी विश्वास के कारण मौनी अमावस्या को गंगा स्नान के लिए हिंदू पंचांग का सबसे महत्वपूर्ण दिन माना जाता है। इस अवसर पर लाखों श्रद्धालु गंगा और अन्य पवित्र नदियों में आस्था की डुबकी लगाते हैं।
उत्तर भारतीय पंचांग के अनुसार, मौनी अमावस्या माघ मास के मध्य में पड़ती है, इसी कारण इसे माघी अमावस्या भी कहा जाता है। अनेक श्रद्धालु न केवल मौनी अमावस्या के दिन, बल्कि पूरे माघ महीने में गंगा स्नान करने का संकल्प लेते हैं। माघ मास का दैनिक स्नान पौष पूर्णिमा से आरंभ होकर माघ पूर्णिमा तक चलता है, जिसे अत्यंत पुण्यदायी माना गया है।
कुंभ मेले के दौरान मौनी अमावस्या का महत्व और भी बढ़ जाता है। प्रयागराज (पूर्व में इलाहाबाद) में आयोजित कुंभ मेले में यह दिन सबसे प्रमुख स्नान पर्व माना जाता है। इसे अमृत योग का दिन और कुंभ पर्व का मुख्य अवसर भी कहा जाता है, जब साधु-संतों, अखाड़ों और श्रद्धालुओं की भारी भीड़ संगम तट पर पवित्र स्नान के लिए एकत्र होती है।
कुंभ मेला तिथियाँ 2019
कुंभ मेला तिथियाँ 2013
कुंभ मेला तिथियाँ 2025
मौनी अमावस्या को मौनी अमावस (मौनी अमावस) के नाम से भी जाना जाता है। जैसा कि नाम से स्पष्ट है, यह दिन मौन व्रत के लिए समर्पित होता है। इस दिन अनेक श्रद्धालु मौन रहने का संकल्प लेते हैं और पूरे दिन बिना कुछ बोले उपवास रखते हैं। धार्मिक मान्यता है कि मौन व्रत और पवित्र स्नान से आत्मशुद्धि होती है और पुण्य की प्राप्ति होती है।