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रथ सप्तमी 2026: तिथि, स्नान मुहूर्त और धार्मिक महत्व

January 25
रथ सप्तमी 2026: तिथि, स्नान मुहूर्त और धार्मिक महत्व

वर्ष 2026 में रथ सप्तमी का पावन पर्व रविवार, 25 जनवरी 2026 को मनाया जाएगा। यह पर्व भगवान सूर्य को समर्पित है और माघ माह के शुक्ल पक्ष की सप्तमी तिथि को आता है। धार्मिक मान्यता के अनुसार इसी दिन भगवान सूर्य ने संपूर्ण संसार को प्रकाश प्रदान करना प्रारंभ किया था, इसलिए इसे सूर्य जयंती भी कहा जाता है।

रथ सप्तमी 2026 की तिथि और पंचांग विवरण

सप्तमी तिथि की शुरुआत 25 जनवरी 2026 को रात्रि 12:39 बजे होगी और इसका समापन उसी दिन रात्रि 11:10 बजे होगा। पंचांग के अनुसार दिन का आरंभ और अंत सूर्योदय से माना जाता है। सभी समय नई दिल्ली, भारत के स्थानीय समय के अनुसार 12 घंटे की समय-प्रणाली में दिए गए हैं।

रथ सप्तमी स्नान मुहूर्त 2026

रथ सप्तमी पर स्नान का विशेष महत्व है। इस दिन स्नान का शुभ मुहूर्त प्रातः 05:26 बजे से 07:13 बजे तक रहेगा। स्नान मुहूर्त की कुल अवधि 1 घंटा 47 मिनट की होगी। अरुणोदय काल प्रातः 06:48 बजे से प्रारंभ होगा, जबकि प्रेक्षणीय सूर्योदय का समय 07:13 बजे रहेगा।

अरुणोदय काल में स्नान का धार्मिक महत्व

रथ सप्तमी पर अरुणोदय काल में स्नान करना अत्यंत शुभ माना जाता है। अरुणोदय काल सूर्योदय से पहले लगभग चार घटी तक रहता है, जिसे भारतीय समय गणना के अनुसार लगभग डेढ़ घंटे का समय माना जाता है। इस अवधि में किया गया स्नान व्यक्ति को निरोगी रखने वाला और सभी प्रकार के रोगों से मुक्ति देने वाला माना जाता है। इसी कारण इस पर्व को आरोग्य सप्तमी भी कहा जाता है।

दान-पुण्य और सूर्य उपासना का फल

रथ सप्तमी को अत्यंत पुण्यदायी दिन माना गया है और इसे सूर्य ग्रहण के समान फलदायी बताया गया है। इस दिन उपवास, दान-पुण्य और सूर्य देव की आराधना करने से सभी प्रकार के पापों से मुक्ति मिलती है। मान्यता है कि वर्तमान और पूर्व जन्मों में किए गए, जानबूझकर या अनजाने में हुए, मन, वचन और कर्म से किए गए सात प्रकार के पाप इस दिन सूर्य उपासना से नष्ट हो जाते हैं।

अर्घ्यदान और पूजा विधि

स्नान के पश्चात सूर्योदय के समय भगवान सूर्य को अर्घ्य देना चाहिए। अर्घ्यदान छोटे कलश से, हाथ जोड़कर नमस्कार मुद्रा में, खड़े होकर सूर्य की ओर मुख करके किया जाता है। इसके बाद शुद्ध घी का दीपक जलाकर कपूर, धूप और लाल पुष्पों से सूर्य देव की पूजा की जाती है। इस विधि से की गई उपासना से दीर्घायु, उत्तम स्वास्थ्य और समृद्धि की प्राप्ति होती है।

रथ सप्तमी का अन्य नाम

रथ सप्तमी को अचला सप्तमी के नाम से भी जाना जाता है। यह पर्व आस्था, स्वास्थ्य और आध्यात्मिक शुद्धि का प्रतीक माना जाता है, इसलिए इसका विशेष धार्मिक और सांस्कृतिक महत्व है।

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